पुण्य स्मरण वे सर्वोदय आन्दोलन की बेहद महत्वपूर्ण शख्सियत थे. उनका जाना सर्वोदय आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है। गांधी पीस फाउंडेशन, राउरकेला के पूर्व कार्यकर्ता और उत्कल सर्वोदय मंडल के पूर्व अध्यक्ष नारायण दास नहीं रहे। 20 जून को दोपहर 12.30 बजे केआईएमएस, भुवनेश्वर में उनका निधन हो गया। […]

गंगोत्री घाटी के कोपांग में आईटीबीपी चौकी के समीप यह एक ऐसा अद्भुत और अलौकिक वृक्ष है, जो एक ही वृक्ष में देवदार के बीस विशाल वृक्ष समेटे हुए है। जमीन से ऊपर उठता हुआ मुख्य तना और उसके ऊपर से निकलती इसकी बीस शाखाएं, जो बीस की बीस अपने […]

भवानी शंकर कुसुम द्वारा किये गये प्रयासों और उत्कृष्ट कार्यों के लिए 12 मई 2022 को यूएनसीसीडी कॉप-15 द्वारा आबिदजान, अफ्रीका में उन्हें आधिकारिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। सम्मेलन में 158 देशों से स्वैच्छिक संगठनों तथा सरकारी विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। ग्राम भारती समिति के सदस्य और […]

डॉ बनवारी लाल शर्मा के बारे में सुनकर यह यकीन नहीं होता है कि बीते दशक में कोई ऐसा मनुष्य भी था। उपनिवेशवाद से संघर्ष के पश्चात भारत को स्वतंत्रता मिली। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश आत्मनिर्भरता की राह पर चला। पर 80 के दशक में वैश्विक पूंजीवाद के दबाव […]

धर्म के आधार पर भेदभाव गांवों की तुलना में शहरों में कहीं अधिक है। जाति के आधार पर भेदभाव, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों के खिलाफ, शहरों की तुलना में गांवों में अधिक है। हालांकि लिंग के आधार पर भेदभाव गाँवों के साथ-साथ शहरों में भी है, यह बात स्कूल […]

झारखण्ड में कुड़मि समुदाय दरअसल अनुसूचित जन जाति है, इसके कई प्रामाणिक तथ्य मौजूद हैं। वर्ष 1913 के भारत सरकार के गजट में स्पष्ट रूप से कुड़मि समुदाय अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल था और 1931 तक की जनगणना में भी कुड़मि समुदाय को आदिम जनजाति की सूची में […]

राजनीति, धर्म, कानून और स्थानीय समाज शक्ति के स्रोत व केंद्र हैं. इन सभी के आपसी संवाद से ही हल तय हो सकता है. ऐसा संवाद कायम हो, इसकी कोशिश स्थानीय समाज को ही करनी होगी. वाराणसी में एक बार फिर मंदिर-मस्जिद विवाद शुरू हो गया है. काशी विश्वनाथ मंदिर […]

सिलंगेर आंदोलन के एक साल एक साल पहले 12-13 मई की दरमियानी रात सिलंगेर में सीआरपीएफ ने रातों रात अपना कैंप बना डाला था। सुबह जब आदिवासियों को पता चला तो वे वहां पहुंचे। तीन दिन तक हजारों की संख्या में आदिवासी कैंप को हटाने की मांग करते रहे, लेकिन […]

पीढ़ियां भुगतेंगी खामियाजा, संयुक्त राष्ट्र क्लाइमेट रिपोर्ट की चेतावनी मनुष्य की गतिविधियों के कारण धरती, महासागर व वातावरण में व्यापक बदलाव आ रहा है। विकास व पारिस्थितिकी तंत्र पर लंबे समय में इसके दुष्परिणाम होंगे। हमारी जलवायु हमारी आंखों के सामने बदल रही है। मानव-जनित ग्रीनहाउस गैस में एकत्र ताप […]

अपनी एक रिपोर्ट में नीति आयोग कहता है कि वर्ष 2030 तक देश के 40% लोगों की पहुंच पीने के पानी तक नहीं होगी. पिछले 10 सालों में देश की करीब 30 फीसदी नदियां सूख चुकी हैं। वहीं पिछले 70 सालों में 30 लाख में से 20 लाख तालाब, कुएं, […]

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