पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा के अनेक प्रेरणास्रोत रहे। उनके वनाधिकारी पिता अंबाप्रसाद बहुगुणा का देहावसान उनके बचपन में ही हो गया था। गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा उन्हें पिता से विरासत में मिली। मां पूर्णा देवी ने कड़ी मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण किया। हिम्मत रखने, कष्टमय जीवन से न घबराने […]

इकतीस दिसम्बर दो हजार उन्नीस को डब्ल्यूएचओ को नोटीफाई किया गया कि वुहान में एक अनजान तरह के न्यूमोनिया से लोग बीमार हो रहे हैं। वैज्ञानिक एकमत हुए कि यह एक वायरसजन्य बीमारी है, जो शायद किसी जंगली चमगादड़ प्रजाति से आई है, पर एचआईवी वायरस की खोज के लिए […]

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल की अपील सभी प्रदेश एवं जिला सर्वोदय मंडलों के अध्यक्षों की सेवा में— साथियों,जयजगत! भारत समेत दुनिया के कई देश इस समय नये कोरोना वायरस के तेजी से पैâल रहे संक्रमण का सामना कर रहे हैं। देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर […]

आज पूरा देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की विपदा से जूझ रहा है। अब यह लहर शहरों की सीमा पार कर गांवों तक फैल गया है। परिणामस्वरूप गंगा सहित अन्य नदियों में मानव शवों का बहते देख रहा है। यह विपदा अकेले सरकारों की चुनौती नहीं है। समाज के […]

हर किसी के लिए कोरोना की आपबीती अलग रही है, इसलिए हर कोई अपने-अपने नजरिये से इसे देखने और समझने का प्रयास कर रहा है। बीते दिनों में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कोरोना काल के अपने-अपने दुःखों को बयान किया। समय तो वाकई विकट ही था, क्योंकि हमने […]

शीर्ष पर, खूब सारी ऊंचाई पर – भले ही वह खुद की असफलताओं के कचरे और उसके चलते हुई लाखों जिंदगियों की टाली जा सकने वाली मौतों से इकट्ठी हुई लाशों के हिमालयी ढेर की ऊंचाई ही क्यों न हो–पहुँच जाने के बाद दिमाग सनक जाता है, विवेक लुप्त हो […]

जिस समय देश के करोड़ों-करोड़ नागरिकों के लिए एक-एक पल और एक-एक साँस भारी पड़ रही है, सरकारें महीने-डेढ़ महीने थोड़ी राहत की नींद ले सकती हैं। यह भी मान सकते हैं कि जनता चाहे कृत्रिम साँसों के लिए संघर्ष में लगी हो, देश के नियंताओं को कम से कम […]

सिस्टम जी, मैं बड़ी बेकरारी से आपका पता ढूंढ़ रहा था, जिससे कि अपने विचारों को आपके सम्मुख प्रस्तुत कर सकूं, लेकिन मुझे कोई भी आपका सही पता नहीं बता सका। इसलिए मेरे पास इस लेख को लिखने के अलावा कोई चारा नहीं था, जिसे पढ़कर आप अपने बारे में […]

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कोविड (कोरोना) महामारी के दो दौर भारत पेâल हो चुका है और तीसरी लहर दस्तक दे रही है। पहली लहर में हमने बिना तैयारी के लॉकडाउन झेला। फलस्वरूप देश भर से मजदूरों का अपने गांव की ओर पैदल ही पलायन के दृश्यों ने हमारी असंवेदनशीलता प्रकट की। ऐसा लगा कि […]

आजादी के बाद गांधीजी अहिंसक क्रांति के माध्यम से लोकसत्ता का निर्माण करना चाहते थे, किन्तु राजसत्ता केन्द्रित परिवर्तन की नीति के कारण ‘लोक’ को लक्ष्य समूह (Target Group) एवं लाभार्थी (Beneficiary) में तब्दील कर दिया गया। राजसत्ता एवं अर्थसत्ता अधिकाधिक केन्द्रीकृत होती चली गयी। इस कारण प्राकृतिक दााोतों व […]

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