सर्व सेवा संघ और तेलंगाना सर्वोदय मंडल की तरफ से 18 अप्रैल को 71 वां भूक्रांति दिवस मनाया गया। स्मरणीय है कि 18 अप्रैल 1951 को ही विनोबा को पहला भूदान मिला था। पोचमपल्ली के तत्कालीन जमींदार वेदरे रामचंद्र रेड्डी ने 100 एकड़ भूमि दान करके इस महान यज्ञ का […]

मौजूदा दौर : औरतों की आजादी की कठिन होती राह विषयक गोष्ठी संपन्न सात मई को रांची के रामदयाल मुंडा आदिवासी शोध संस्थान में समाजकर्मी कनक की स्मृति में एक संगोष्ठी संपन्न हुई. विषय था- मौजूदा दौर : औरतों की आजादी की कठिन होती राह. उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष […]

आइए, इस यात्रा के बहाने बापू के पास चलें, भगत, अशफाक, बिस्मिल और अनेकानेक शहीदों के पास चलें। उस हिंदुस्तान में चलें, जो अंबेडकर के ख्वाब में पल रहा था, जो विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर के उद्दात मानवतावादी आदर्शों में व्यक्त हो रहा था।   आजादी के 75 साल के […]

सत्य का प्रयोग रवीन्द्र सिंह चौहान की लिखी यह कहानी एक वास्तविक घटना है, जब रेलवे के जिम्मेदार कर्मचारियों/अधिकारियों ने उनसे नाजायज़ तौर पर दस रूपये का जुरमाना वसूला था. इस अन्याय के खिलाफ चली लंबी लड़ाई में अंततः उनकी जीत हुई और रेल विभाग के नई दिल्ली स्थित धन […]

प्राकृतिक चिकित्सा लीवर हमारे शरीर का बहुत ही अहम अंग है, जो शरीर की अनेक क्रियाओं पर नियंत्रण रखता है। लीवर की कार्यक्षमता कम होने से व्यक्ति को शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जब लीवर काम करना कम कर देता है, तो शरीर में कमजोरी आ जाती […]

लिबरल हो या मार्क्सवादी, सावरकर के अनुचर हों या नेहरू के, सब गांधी की सोच को दक़ियानूसी, विज्ञान विरोधी करार देने पर आमादा थे (और आज भी हैं)। पश्चिमी शिक्षा और सोच से लैस देश का बुद्धिजीवी आज भी गांधी को ‘एक अच्छा इंसान, महात्मा और राष्ट्रपिता’ मानता है, लेकिन […]

परिसर की खोज और निर्माण की कहानी गोडसेजी ने एकदिन मुझसे कहा कि अगर आप चाहते हों तो उस जमीन के लिए मैं कोशिश कर सकता हूं। प्रकाशन के लिए जमीन खरीदनी ही थी। मैंने उन्हें इजाजत दे दी। पहले तो यह पता करना ही टेढ़ी खीर साबित हुई कि […]

जमीन के वितरण से लेकर भगवद्भक्ति तक का पंचविध कार्यक्रम सच्चे अर्थों में ग्रामराज्य, रामराज्य, लोकराज्य या स्वराज्य का स्वरूप होगा।  दुनिया तृषित होकर शांति की तीव्र खोज में है। सबसे पहले अधिष्ठान को लें तो भूमि अधिष्ठान है, जिसका विषम बंटवारा ही समाज रचना की सारी अच्छाइयों को नष्ट कर रहा है। ऐसे […]

भूदान से करुणा का एक छोटा सा प्रवाह निकला, लेकिन जब वह प्रवाह समुद्र में आया, तब उसे समुद्र का रूप मिला। ग्रामदान एक समुद्र और भूदान एक नदी है। बाबा का भूदान यज्ञ नदी के जरिए समुद्र में प्रवेश कर रहा था. आज 23 मई का दिन बहुत पावन दिन […]

यह केवल जमीन बांटने का काम नहीं, बल्कि हिंदुस्तान को एकरस बनाने का काम है, दिल के साथ दिल जोड़ने का काम है, हृदय शुद्धि का काम है। भूदान एक नैतिक आंदोलन है। सच्चे अर्थों में यह धर्म-प्रतिष्ठा का काम है। कोई भी साधना जब तक व्यक्तिगत रहती है, तब […]

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