सभी से प्रेम करना उनकी विशेषता रही है. 
सर्वोदय दर्शन के प्रति समर्पित उनकी निष्ठा ने उन्हें हमेशा अस्पृश्य कही जाने वाली जातियों के साथ रहने की प्रेरणा दी. इसके चलते उन्हें युवावस्था से ही सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा. सेवा ग्राम आश्रम प्रतिष्ठान वर्धा की पहली महिला अध्यक्ष आशा बोथरा […]

सेवा ग्राम आश्रम प्रतिष्ठान की नयी अध्यक्ष आशा बोथरा का कहना है कि सेवाग्राम आश्रम की वैश्विक ख्याति के मद्देनजर इस स्थान से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का सदुपयोग हमें समाज में घोले जा रहे नफरत के विष को शांत करने में करना है. सेवाग्राम की पुण्यभूमि उन सभी को […]

महर्षि अरविंद ने भी विश्व राज्य का स्वप्न देखा और विनोबा भी सब राष्ट्रों के एक परिवार के अभिलाषी हैं। इसके लिए परस्परावलंबन के विचार को अपनाना होगा। समत्व के लिए विनोबा का यह तर्क है कि उंगलियों की समानता जितना समत्व तो साधना ही चाहिए। समाज की पंच शक्तियों […]

  स्वतन्त्रता आन्दोलन के महान आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्म और आध्यात्मिक चिंतक विनोबा भावे के निर्वाण दिवस के अवसर पर 15-16 नवंबर को श्रमभारती, खादीग्राम में दो दिवसीय साम्प्रदायिक सत्ता विरोधी समागम का आयोजन किया जा रहा है. लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण अभियान की और से आयोजित हो रहे […]

आज 14 नवंबर का दिवस काफी महत्वपूर्ण है । बाल दिवस या अन्य कुछ इसके महत्व भी हैं ही।लेकिन कल 15 नवंबर को बाबा विनोबा का निर्वाण दिवस है। जिसके स्मृति में पवनार आश्रम में गत चार दशक से मित्र मिलन का आयोजन होता आ रहा है। गत वर्ष कोरोना […]

बाबा का कहना था कि ग्रामोद्योगों से आप कहते हैं वे अपने पैरों पर खड़े रहें। यह तो वही बात हुई कि आप मेरी टांगें तोड़ देते हैं और फिर टांगों पर खड़े रहने को भी कहते हैं। आप शाबाशी दें कि फिर भी हम हाथों के बल चल कर […]

राजनीति की प्रक्रिया ऊपर से नीचे जाने की है, जबकि लोकनीति की प्रक्रिया नीचे से ऊपर जाने की  है। राजनीति में सारी सत्ता केंद्र में होती है, लोकनीति में वही सत्ता गांव-गांव में होती है। वैसे तो सर्वोदय सर्वव्यापी है, वह राजनीति से अलग नहीं है, लेकिन सर्वोदय की अपनी […]

बाबा ने सभी से कहा कि आपने बहुत शौर्य दिखाया, अब अक्ल भी दिखानी चाहिए। यह काम मानव को करना ही न पड़े, यह अक्ल अब सूझनी चाहिए। सबको मिलकर इसका उपाय ढूंढना चाहिए कि मेहतर को भी यह काम न करना पड़े, तभी भंगीमुक्ति का कार्य हो सकेगा। बाबा […]

गोपीनाथ नायर ने जीवन भर गांधीवादी सिद्धांतों को जिया। उन्होंने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया था और आचार्य विनोबा भावे के साथ भूदान और ग्रामदान आंदोलन में भी काम किया था। सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष, गांधीवादी विचारक, स्वतंत्रता सेनानी और पद्म श्री से सम्मानित पी […]

न्याय का नैसर्गिक आदर्श कहता है कि कोई दोषी छूटना नहीं चाहिए और किसी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए. किसी का किसी पीड़ित की मदद करना किसी मामले को खींचना किस प्रकार हुआ, यह सवाल देश में ही नहीं, दुनिया के अनेक सामाजिक मोर्चों पर जेरे बहस है 27 […]

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