जो आदमी सरकार में होता है, उसे न गांधी पसंद होता और न सत्याग्रह। गांधी, हिन्द स्वराज और सत्याग्रह को ज़िंदा रखना है, तो ख़ुद ही गांधी के रास्ते पर चलकर आम जानता को जगाना और संगठित करना होता है। ये तुषार गांधी भी अजीब आदमी हैं। बिहार के मुख्यमंत्री […]

धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति ने राजनीतिक दलों के लिए चुनाव जीतना आसान कर दिया है, इसलिए वे आम लोगों के पक्ष में व्यवस्था परिवर्तन की ज़रूरत नहीं महसूस करते. जो लोग व्यवस्था परिवर्तन की बात करते हैं, वे बिखरे हुए हैं. सर्वोदयवादी, गांधीवादी, जेपीवादी, लोहियावादी, अम्बेडकरवादी, समाजवादी और मार्क्सवादी आदि […]

गुनहगार तो हैं मोरारजी देसाई, चरण सिंह, जनजीवन राम, राज नारायण और चंद्रशेखर, जो अपनी सत्ता-लिप्सा के चलते जनता पार्टी को एकजुट नहीं रख पाये और संघ को फिर से अपनी राजनीतिक शाखा भारतीय जनता पार्टी बनाने का मौक़ा दिया. फिर भी यह जेपी का ही प्रभाव था कि भाजपा […]

इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों से प्रचार का पैकेज तय करते हैं. इसमें एक बड़ा हिस्सा ब्लैक मनी का होता है. लाभार्थी मीडिया भला इस मुद्दे पर क्यों अभियान चलायेगा? अब यह काम आम नागरिकों का है कि चुनावी चंदे की पारदर्शिता और खर्च की सीमा बांधने […]

टाउन प्लानिंग में कई तरह के विशेषज्ञों का योगदान होता है, जिसमें सर्वाधिक ज़रूरी है भूगोल या ज्योग्राफ़ी का ज्ञान. यानी ज़मीन कैसी है, पानी की उपलब्धता क्या है, पानी का ढलान किधर है और कितने जलाशय चाहिए. इसके बाद सिविल इंजीनियर, आर्किटेक्ट, सिविल सर्वेंट्स और पॉलिटिशियंस का नंबर आता […]

हमें एक व्यापक विमर्श के ज़रिये स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व पर आधारित भारत के विकास का सर्वमान्य एजेंडा बनाना चाहिए, ताकि जब हम 2047 में आज़ादी की सौवीं जयंती मनायें तो भारत एक सुखी, संतुष्ट और समृद्ध राष्ट्र हो।   एक उत्सवधर्मी देश के रूप में हमने भारत की […]

अगर लोगों से जुड़ना है, तो हमें उनकी ज़िन्दगी से जुड़े सवालों से जुड़ना होगा। लोगों को ताक़त देने वाले कार्यक्रम सोचने होंगे, जैसे आज़ादी की लड़ाई में अस्पृश्यता निवारण, चरखा, गोसेवा, बुनियादी शिक्षा जैसे कार्यक्रम लिए गये थे। अगस्त का महीना भारतीय राजनीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसी […]

ज़रूरत है कि लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट, सरकारों की बदनीयती, प्रतिशोध और दुश्चक्र को पहचान कर नागरिकों की रक्षा करें। हमें यह याद रखना चाहिए कि समाज की एकता और अखंडता के लिए न्याय एक अनिवार्य तत्व है, जिस राज्य और समाज में न्याय नहीं होगा, देर-सबेर उसका विखंडन निश्चित […]

सर्वोच्च अदालत ने न केवल दंगा पीड़ित जकिया एहसान जाफ़री की याचिका ख़ारिज कर दी, बल्कि उन लोगों को कठघरे में खड़ा करने के हुक्म दे दिया, जो याचिकाकर्ता के हमदर्द माने जाते हैं, यद्यपि वे न तो मामले के पक्षकार थे और न उनको दोषी करार देने से पहले […]

संविधान में मिली अभिव्यक्ति की आज़ादी तभी कारगर होगी, जब पत्रकारों को निर्भय होकर काम करने का मौक़ा मिले और ग़लत करने वालों के खिलाफ शिकायत का एक स्वतंत्र क़ानूनी फ़ोरम हो। हाल ही में एक टेलीविज़न डिबेट में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के […]

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